सोमवार, 28 जून 2010

एक सपना और तलाश सपने की

a week ago I saw blog of one of my friend Sheetal, I found her blog post really inspiring, 
her blog inspired me to write this. 
she left her MNC job, to peruse her dream that is becoming a film maker.
the saying "dream is not that u see when u r sleeping, dream is something that not let u sleep", is very much true.
this is dedicated to everyone, who can't sleep, because, their dream is not letting them sleep.
I am not a good writer/poet, but, I am making a honest attempt, hope, everyone will like my creation.

एक  सपना  देखा  मैंने, फिर सो न  सकी , बहुत कोशिश  की, 
पर  नीद मेरी पलकों से  कोशों दूर थी, 
मै  उठी, और बस अपने सपने, अपनी मंजिल की तलाश में चल पड़ी, 
मै  चलती  रही, बढती  रही, थक गयी, पर हारी नहीं,
सोचा  मैंने, के  मै  कहा  आ गयी हु? यकीन था की कही तो आ गयी हूँ,
मुझे यकीन है, के मंजील के  एक कदम और करीब आ गयी हूँ -2,

मै  तो कुछ भी थी सोच कर चली नहीं, 
इसलिए क्या मिला क्या खो गया, इस बात का मुझे गिला नहीं,
ज़माना क्या कहता  मेरे  बारे में, क्या फर्क पड़ता है,
मै तो किसी से भी आज तक मिली नहीं, किसी ने मुझसे तो  आकर कुछ भी कहा नहीं,
मेरी राहें ही  हैं मेरी हमसफ़र, मेरी हमकदम, 
मैंने रहो को अब तक दिया दगा  नहीं, क्या हुआ  गर साथ कोई मेरे चला नहीं...


जो गिर गयी तो फिर से उठूंगी, खुद को सम्हाल कर फिर चल पडूँगी,
दर्द मुझे बस, हर पल  हो रही देरी का होगा, और किसी दर्द की परवाह न  करुँगी,
मंजिल  का पता है मुझे, रास्तो का पता है, 
कोई न बताये तो कोई बात नहीं, मै रहे अपने मंजिल की धुंड लुंगी,
जो  न चलने दिया मुझे ज़माने ने इन रहो पे, तो मै अपनी राहें खुद बना लुंगी,
अब अपनी मंजिल पर ही जा कर रुकुंगी, अब तो वही जाकर साँस लुंगी -2

न थाकुंगी न रुकुंगी, जब तक पहुँच न जाऊ  मंजिल तक,
मै हर रोज बढती रहूंगी, बस  अब  ठान लिया  है, बढती रहूंगी,
किसी  ने  कहा है:
 "मंजिले उन्ही को मिलती हैं, जिनके सपनो में जान होती है,
  पंखों से कुछ  भी नहीं होता है दोस्तों, हौसलों  से  उड़ान  होती  है"
कोई  ये  न  सोच  लेना  के, पंख नहीं  हैं  मेरे  तो  मै  कैसे  udungi?
मुझे  यकीन है मै एक दिन आस्मां  की  सैर  करुँगी,
हौसला मुझमे है आसमान को छूने का, एक दिन मै आसमान छूकर रहूंगी-2,
एक दिन मै आसमान छूकर रहूंगी

3 टिप्‍पणियां:

  1. सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो अपने को पूरा करने का विश्वास रखते हैं।

    कृपया वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें। यह न केवल मेरी उम्र के लोगों को तंग करता है पर लोगों को टिप्पणी करने से भी हतोत्साहित करता है। आप चाहें तो इसकी जगह कमेंट मॉडरेशन का विकल्प ले लें।

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