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बिन कहे ही सब कुछ बता दिया

अलफ़ाज़  हमेशा  नहीं  होते  अंदाज़-ए-बयाँ का  जरिया, ये हमने  जाना उस  दिन, जब मैंने अपना  हाल-ए-दिल  उनको  अपनी  आँखों  में  पढ़ा  दिया, देखा  तो  बहुत  देर  मैंने  उनको, पर  कुछ  भी  न  कहा , न  कुछ  कह  कर  भी  मै  बहुत  कुछ  कह  गया, और  बिन  कहे  ही  मैंने  सब  कुछ  बता  दिया, चुप  चाप  ही  मैंने  सब  कुछ  सुना  दिया , बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया , बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया... बहुत   सोचता  था  के  उनसे  ये  कहूँगा, जो  आयेंगे  वो  मेरे  सामने, उनको  बहो  में  भर  लूँगा, नर्म  नर्म से उनके  हाथो को  अपने  हाथो  में  ले  कर, एक  शरारत  से  उनके ...