ना जाने क्यों आज ये मेरा दिल बेकरार है , ना जाने दिल पे छाया ये कैसा खुमार है, फिर दिल को न जाने क्यों तेरी पायल की छम-छम का इन्तेजार है, तू ही बता मुझे क्यों ये तड़पता है, क्यों रहता बेकरार है,तू ही बता दे मुझे, के कैसा ये खुमार है वैसे तो सब कुछ है मेरे पास, पर लगता है के कुछ भी नही है, कहने को तो सारा जहाँ है मेरे साथ, पर तेरी कमी सी है, तेरी याद में रुक गया है मेरा जहाँ, और मेरी साँसे थमी सी हैं, हर दावा से दुआ से बढ़ता जाता, न जाने यह कैसा बुखार है, तू ही बता दे मुझे, के कैसा ये खुमार है तू नही है मेरे नज़रों के सामने, पर बस तू ही एक मेरे नज़रों में बसी है, दूर तक निशान नही है तेरा, पर फिजा में तेरी ही खुशबु बसी है, तू दूर हैं मुझसे, इसका इल्म मुझे भी है, पर दीवानी यह मेरी आखें हर पल तुझे ही देखती हैं, और ये पागल दिल कहता है मेरा, के तू धड़कन बन के इस दिल में बसी है, तेरा दीदार न हो तो रहती हैं मेरी आखें सुनी, और रहता यह दिल बेकरार है,तुही बता दे मुझे के यह कैसा खुमार है, रात भर करवटों पे करव्तानें बदल...