"बस , अब मै और न जी पाऊंगा लड़ लड़ इस जहा के साथ, आज मेरा लड़ लड़ के गमो से जीने का हौसला टूट गया है" इस कदर हमसे हमारा हमनवा रूठ गया है , लगता है प्यासी धरती से जैसे खुदा रूठ गया है , न पूछा न बताया ही के क्या है गलती मेरी , न जाने क्यो वो हमसे बे - वजह रूठ गया है ... अब हम मुस्कुराते नही हैं , ये शिकायत न करना कोई , मुझसे मेरी खुशियों का खुदा रूठ गया है , अचानक , न जाने क्यो बोझ सी लगाने लगी है जिंदगी , ऐसा लगता है मुझसे जीने का हौसला रूठ गया है , न जाने क्यो , युही वो बे - वजह रूठ गया है ... आती थी खुशियाँ संग उसके ही मेरे दर्र तक , अब भूले से भी गुजरती नही हैं खुशियाँ मेरे दर्र से , ऐसा लगता है मेरी जिंदगी की सड़क से खुशियों का काफिला रूठ गया है , वो क्या रूठा हमसे , हमसे ये सारा जहाँ रूठ गया है , न जाने क्यो हर कोई हमसे बे - वजह रूठ गया है ... आसन नही थी कभी भी ये जिंदगी मेरी , मैंने लड़ के हासिल की है हर खुशी मेरी , बस अब मई और न ...