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कैसे टुटा शीशा???

सवाल ये नही के कैसे टुटा शीशा, सवाल ये नही के कितने टुकडो में टुटा शीशा,
सवाल ये भी नही के क्यों टुटा शीशा, सवाल तो ये है के पत्थर किधर से आया...?

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ज़िंदगी की कहानी

            ज़िंदगी की बस यही इतनी सी कहानी है, ज़िंदगी बीत जाएगी एक दिन, पीछे बस यादें छूट जानी हैं, ज़िंदगी की यही बस इतनी सी कहानी है। ज़िंदगी का अजीब ये फ़लसफ़ा है, बेहद दिलचस्प इसकी बयानी है, कभी खुशियां हैं बेशुमार, मुस्कुराहटें हैं होंठों पे और मौंजो की रवानी है, तो  कभी गम हैं जानलेवा, अश्क़ हैं, और बेइन्तहां दर्दों में कई दिन और रातें बीत जानी हैं, थोड़ी अजीब तो है, पर कुछ ऐसी ही ज़िंदगी की कहानी है।

देखी है मैंने एक नन्ही सी परी

मैंने बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं है, पर आज मेरी एक खास ख़ुशी शेयर करने के लिए २ पंक्तियां लिख रहा हु। मेरी प्यारी भांजी के नाम : देखी है मैंने एक नन्ही सी  परी,  फूलों सी  नाजुक, एक नन्ही कली सी, देखी है मैंने एक नन्ही सी परी। जिसे देखते ही मेरी आँखों में चमक सी आ गयी,  एक ही पल में मुझे कितने बचपन दिखा गयी, ऐसा लगता है आसमान से उतर के परी आ गयी। कलियों से भी नाजुक, मासुमियत से भरी, देखि है मैंने एक नन्ही सी परी।  

ये नेता नहीं हैं, ये हैं मौत के सौदागर

धरा  बेच  देंगे, गगन  बेच  देंगे, ये  नेता  नहीं  हैं, ये  हैं  मौत  के  सौदागर, ये  तो  लाश  पर  से  उठा  कर  कफ़न  बेच देंगे, खुशियाँ  मानना इनसे  बचकर  ज़रा, नहीं  तो  ये  तेरा  खुशियों  से  भरा  आँगन  बेच  देंगे , कभी  किसी  से  न  कहना , के , ये  नीला  आसमान  हमारा  है , पाता  नहीं  किसको  ये  नीला  गगन  बेच  देंगे , जाना  जो  कभी  तू  बाग़  में , तो  सांस  धीरे  से  ही  लेना , नहीं  तो  ये  हमारा  महकता  हुआ  चमन  बेच  देंगे , इन्हें  तो  हर  दिन  इन्तेजार  होता  है  बस  हादसों  का , गर  लाशें जमा  करने  पर  भी  वोटें   मिलने  लगे  इनको , तो  लाश  इक्कठा   ...