धरा बेच देंगे, गगन बेच देंगे, ये नेता नहीं हैं, ये हैं मौत के सौदागर, ये तो लाश पर से उठा कर कफ़न बेच देंगे, खुशियाँ मानना इनसे बचकर ज़रा, नहीं तो ये तेरा खुशियों से भरा आँगन बेच देंगे , कभी किसी से न कहना , के , ये नीला आसमान हमारा है , पाता नहीं किसको ये नीला गगन बेच देंगे , जाना जो कभी तू बाग़ में , तो सांस धीरे से ही लेना , नहीं तो ये हमारा महकता हुआ चमन बेच देंगे , इन्हें तो हर दिन इन्तेजार होता है बस हादसों का , गर लाशें जमा करने पर भी वोटें मिलने लगे इनको , तो लाश इक्कठा ...
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