क्या है इतने गहरे समंदर में ?
कभी कस्ती, कभी तूफ़ां, कभी लहरें, कभी उनकी मस्ती, समंदर में;
कई यादें, कई आंसू, कई चहरे समंदर में.
आज तक कौन समझा है की क्या है इतने गहरे समंदर में,
शायद खुद समंदर भी नहीं??
कभी कस्ती, कभी तूफ़ां, कभी लहरें, कभी उनकी मस्ती, समंदर में;
कई यादें, कई आंसू, कई चहरे समंदर में.
आज तक कौन समझा है की क्या है इतने गहरे समंदर में,
शायद खुद समंदर भी नहीं??
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