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मुझे हर पल बस तेरा ही खय़ाल है

मैं तुझसे कहूँ या ना कहूँ, तुझे तो मालूम है, के मेरा क्या हाल है, मेरे ख्वाबों पे हुकूमत है बस तेरी, तुझ से ही मेरा ये रंग-ए-जमाल है, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही  खय़ाल है॥ जब सोचता हूँ तेरे बारे में, मैं यूँ ही बेवजह मुस्कुराता हूँ, जब सोचूं तेरे बारे में,  कुछ और सोच नहीं पता हूँ। तुझसे इक पल कि इस  दुरी से ही देख  हाल मेरा बेहाल है, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही  खय़ाल है॥ मैं चाहता हूँ कह दूँ, कि तुही मेरी ज़िंदगी है, पर अल्फ़ाज़ों में कह न सकूंगा के तुझसे ही जुडी मेरी हर ख़ुशी है, ज़ज्बातों कि बात और है, उनकी तो सुनता कोई नहीं है, पर तुझे तो मालूम है कि अल्फ़ाज़ों से मेरी कभी बनी नहीं है, बड़ी उलझन में हूँ, कैसे कहूं कि तेरी याद में मेरा हाल बेहाल है, बिन कहे ही समझ जाना तू, कि, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही ख्याल है, मुझे हर पल बस तेरा ही  खय़ाल है॥

बिन कहे ही सब कुछ बता दिया

अलफ़ाज़  हमेशा  नहीं  होते  अंदाज़-ए-बयाँ का  जरिया, ये हमने  जाना उस  दिन, जब मैंने अपना  हाल-ए-दिल  उनको  अपनी  आँखों  में  पढ़ा  दिया, देखा  तो  बहुत  देर  मैंने  उनको, पर  कुछ  भी  न  कहा , न  कुछ  कह  कर  भी  मै  बहुत  कुछ  कह  गया, और  बिन  कहे  ही  मैंने  सब  कुछ  बता  दिया, चुप  चाप  ही  मैंने  सब  कुछ  सुना  दिया , बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया , बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया... बहुत   सोचता  था  के  उनसे  ये  कहूँगा, जो  आयेंगे  वो  मेरे  सामने, उनको  बहो  में  भर  लूँगा, नर्म  नर्म से उनके  हाथो को  अपने  हाथो  में  ले  कर, एक  शरारत  से  उनके ...