मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

बिन कहे ही सब कुछ बता दिया

अलफ़ाज़  हमेशा  नहीं  होते  अंदाज़-ए-बयाँ का  जरिया, ये हमने  जाना उस  दिन,
जब मैंने अपना  हाल-ए-दिल  उनको  अपनी  आँखों  में  पढ़ा  दिया,
देखा  तो  बहुत  देर  मैंने  उनको, पर  कुछ  भी  न  कहा ,
न  कुछ  कह  कर  भी  मै  बहुत  कुछ  कह  गया,
और  बिन  कहे  ही  मैंने  सब  कुछ  बता  दिया,
चुप  चाप  ही  मैंने  सब  कुछ  सुना  दिया ,
बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया , बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया...


बहुत   सोचता  था  के  उनसे  ये  कहूँगा, जो  आयेंगे  वो  मेरे  सामने, उनको  बहो  में  भर  लूँगा,
नर्म  नर्म से उनके  हाथो को  अपने  हाथो  में  ले  कर, एक  शरारत  से  उनके  लब  चूम  लूँगा,
जो  उस  दिन  वो आये  मेरे सामने, पल रुक सा  गया, मै  कुछ भी न कह सका,
उनकी नजरो  में जो  देखा मैंने  अपना  अक्स, तो एक  पल को  लगा  जैसे मैंने  ज़न्नत को  पा लिया,
न मैंने कुछ  कहा, न उसने  कुछ कहा, दोनों ही देर तक खामोश रहे,
पर उसने भी खामोशियों की जुबां से अपना हाल-ए-दिन  बता दिया,
न जाने ये  कैसे हुआ, कब हो गया ये, आज भी एक ख्वाब सा लगता है,
के बिन कहे ही हमने एक दुसरे  को सब कुछ बता दिया, खमोश  रह  कर  भी  हाल-ए-दिल  सुना दिया...





खामोश  अल्फाजों  की  ताक़त  को  अब  मै  जनता  हु, वो  न  कहे  मुझसे भले  ही  एक  भी अलफ़ाज़,
पर उसकी  नजरो  में  कैद  हर  खामोश  लफ्ज़  का  मतलब  मै  जनता  हु,
ये  हुआ  है, पर  कभी  कभी  ख्वाब  सा  लगता  है, पर अब  मै खामोशियों   का  मतलब भी जानता हु (kuchh had tak),

अलफ़ाज़  अब  तो  हमेशा ही   कम  से  लगते  हैं, 
जब  भी उनसे कहनी होती है  दिल  की  कोई  बात, हमेशा  अलफ़ाज़  मुझको  कम  से  लगते हैं,
न  जाने कब ये हो गया मुझको, अल्फाजों को छोड़ मैंने खामोशियो  को  अपनी  जुबां  बना  लिया,
एक  लफ्ज़  भी  न  कहा, बस  चुप  रहा, पर  बिन कहे ही सब कुछ बता दिया, बिन  कहे ही सब कुछ बता दिया...

6 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com
    Email- sanjay.kumar940@gmail.com

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  2. very nice..
    nice to read you...and thankz 4 d comments on my blog///
    keep writing and keep visiting...

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  3. mere blog par is baar..
    वो लम्हें जो शायद हमें याद न हों......
    jaroor aayein...

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  4. बहुत बार होता है..जब अल्फाज़ कम पड़ जाते हैं..ख़ामोशी बोलती है..अल्फाजों की अहमियत लेकिन फ़िर भी कभी कम नहीं होती.गीत बहुत सुन्दर लगाया है.

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  5. खामोशियाँ हैं
    और है बस ख्याल तेरा ....
    तुझ से कहूँ ...?
    के हो जाऊं तेरा .....!?!

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