शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

जिंदगी part 2

जिंदगी  हमे  हर  रोज  कुछ  न  कुछ  नया  सिखाती  है...
चाहे  कोई  साथ  चले  न  चले, जिंदगी  बेफिक्र  तन्हा-अकेले  चलती जाती  है,
जिंदगी  इस  तरह  से  हमे  इस  तरह  से  तन्हा  हो  कर  कभी  रुक न जाना नहीं  ये  सिखाती है,
जिंदगी  हर  रोज  हमे  कुछ  नया  बताती है...

न रूकती है, न थकती है, न कभी आलस कर के सुस्ताती है,
चाहे कितनी भी मुश्किल और  कांटो भरी राह हो, ये चलती जाती है,
रुक न जाना कभी काँटों भरी मुश्किल राह देख कर,
काँटों पर चल जिंदगी हमे ये बताती है,
जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ सिखाती है|
ना मुमकिन तो  कुछ भी नहीं, जो  तू चाह तेरी मंजिल है वही,
इंसान को चाँद तक पहुंचा कर जिंदगी हमे ये बताती है,
जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ नया सिखाती है,
जिंदगी हमारी हर पल एक पल आगे निकल जाती है|



5 टिप्‍पणियां:

  1. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई !
    http://hamarbilaspur.blogspot.com/2011/01/blog-post_5712.html

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  2. ये सीखने-सिखाने का सिलसिला अंत तक चलता रहता है..तब भी सीखने को काफी कुछ बचता है
    बहुत अच्छा लिखा है

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