गुरुवार, 24 दिसंबर 2009

क्या तुमने कभी तनहाइयों से बातें की हैं ?

क्या तुमने कभी तनहाइयों से बातें की हैं ?

बहुत कुछ कहती हैं हमसे ये तन्हैयाँ ,

क्या तुमने कभी इनकी बातें सुनी हैं ?


कभी कभी रात में भी बनती हैं परछाईर्याँ,

चाहो न चाहो दूर तक संग चलती हैं ये परछाईर्याँ

क्या तुमने कभी इन परछाईर्याँ से बातें की हैं ?

क्या तुमने कभी तनहाइयों से बातिएँ की हैं ...?



कभी यु ही मिल जाते हैं रहो में कुछ अजनबी ,

देख कर जिन्हें हम बुन लेते हैं ईक पल में ही खवाब कई ,

कुछ ऐसे अजनबी , जिन्हें देख कर लगता है के "हम पहले भी हैं मिले कभी",

क्या तुमने ऐसे मौको पर दिल की बात सुनी है ?

क्या तुमने कभी ऐसे अजनबी से बातिएँ की हैं ?



गुजरी होंगी कई तनहा रातें किसी एक आहात के इन्तेजार में ,

देखा होगा अपना mobile कई बार किसी के कॉल के इन्तेजार में ,

क्या तुमने कभी इस इनेजार में हर पल यु ही तुम्हारा साथी बने उस phone से बातें की हैं ?

के तुमने कभी , उस रात में हर पल तुम्हारे इन्तेजार का हिस्सा बने उस चांदनी रात से बातें की हैं ?

बहुत कुछ कहना चाहती है ये रात तुमसे , क्या तुमने कभी इस रात की बात सुनी है ?



बहुत कुछ कहती हैं तन्हाईयाँ हमसे , है सिने में इसके कई राज बताने को ,

जब बात करोगे अपनी तनहाइयों से , ये तुम्हे हर राज बतएंगी,

चाहे तो छोड़ जाये सारा जहाँ साथ तुम्हारा ,

पर जब कभी भी होगे तुम तनहा , तन्हाई व्हो महबूबा है ,

जो तुम्हारा दामन छोड़ कर न जायेगी , ये हर पर साथ निभाएगी ,

क्या तुमने अपनी महबूबा[महबूब] (तन्हाई) से अपने दिल की बात कही है ?

क्या तुमने कभी उसकी बात सुनी है ? क्या तुमने कभी तनहाइयों से बातें की हैं ?






1 टिप्पणी:

  1. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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