"के बहुत याद आता है वो बचपन मुझे , करना बहाने हर बार
वो लड़ना हर बात पे, वो होली दिवाली वो हसी ठिठोली ,
वो दोस्तों के साथ स्कूल से भाग जन, वो अगले दिन मार खाना,
वो क्रिकेट के matches , वो दोस्तों के अपने-अपने batches,
वो हम भाई-बहनों का करना मार, फिर जी भर के एक दुसरे से दिखाना प्यार,
वो छोटे से पिल्लै पे दिखाना दुलार, वो उसकी की खातिर सुनना बाते बार-बार,
वो छोटे भाई की खातिर करना अपने जिगरी यार से मार,
क्या, क्या बताऊ के याद आता है, के मुझे मेरा बचपन बहुत याद आता है
वो माँ के हाथ की पहली रोटी खाने की खातिर लड़ना, वो पहली रोटी न मिलने पर बहेना का घर में मचाना घमासान,
वो रह रोटी में बस उनका प्यार, वो खाना फेकने पर सुनना बातें चार :),
वो सुखी रोटी में भी गाजर की हलवे सा मज़ा, वो बहार खाना खाने को समझना सज़ा (होटल के खाने मिर्ची ज्यादा होती थी न :) )
वो माँ से करना dishes की डिमांड, वो मेरी खातिर वो बनानें, को वो माँ की दिन रात की मेहनत यार,
क्या, क्या बताऊ के याद आता है, मुझे माँ की हर रोटी का प्यार याद आता है
वो सरे फॅमिली...