सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मई, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुझे मेरा बचपन बहुत याद आता है

"के बहुत याद आता है वो बचपन मुझे , करना बहाने हर बार वो लड़ना हर बात पे, वो होली दिवाली वो हसी ठिठोली , वो दोस्तों के साथ स्कूल से भाग जन, वो अगले दिन मार खाना, वो क्रिकेट के matches , वो दोस्तों के अपने-अपने batches, वो हम भाई-बहनों का करना मार, फिर जी भर के एक दुसरे से दिखाना प्यार, वो छोटे से पिल्लै पे दिखाना दुलार, वो उसकी की खातिर सुनना बाते बार-बार, वो छोटे भाई की खातिर करना अपने जिगरी यार से मार, क्या, क्या बताऊ के याद आता है, के मुझे मेरा बचपन बहुत याद आता है वो माँ के हाथ की पहली रोटी खाने की खातिर लड़ना, वो पहली रोटी न मिलने पर बहेना का घर में मचाना घमासान, वो रह रोटी में बस उनका प्यार, वो खाना फेकने पर सुनना बातें चार :), वो सुखी रोटी में भी गाजर की हलवे सा मज़ा, वो बहार खाना खाने को समझना सज़ा (होटल के खाने मिर्ची ज्यादा होती थी न :) ) वो माँ से करना dishes की डिमांड, वो मेरी खातिर वो बनानें, को वो माँ की दिन रात की मेहनत यार, क्या, क्या बताऊ के याद आता है, मुझे माँ की हर रोटी का प्यार याद आता है वो सरे फॅमिली...

रेत मे कोई फूल खिले एक ज़माना बीत गया

आज ही मैं सब बातें मन की पानी पे लिख आऊँगी, रेत में कोई राज़ बहाए एक ज़माना बीत गया, चलो तुम्हारा नाम लिखें, सागर के किनारे साहिल पर, रेत मे कोई फूल खिले एक ज़माना बीत गया

कैसे टुटा शीशा???

सवाल ये नही के कैसे टुटा शीशा, सवाल ये नही के कितने टुकडो में टुटा शीशा, सवाल ये भी नही के क्यों टुटा शीशा, सवाल तो ये है के पत्थर किधर से आया...?

क्या है इतने गहरे समंदर में?

क्या है इतने गहरे समंदर में ? कभी कस्ती, कभी तूफ़ां, कभी लहरें, कभी उनकी मस्ती, समंदर में; कई यादें, कई आंसू, कई चहरे समंदर में. आज तक कौन समझा है की क्या है इतने गहरे समंदर में, शायद खुद समंदर भी नहीं??

लम्हा लम्हा इन्तेजार

लम्हा लम्हा तन्हा रहे, हम उनके इन्तेजार में, लम्हा लम्हा किया इन्तेर्जार उनके इन्तेजार में, लम्हा लम्हा उठाया लुफ्त इन्तेजार का उनके इन्तेजार में, न जाने किस लम्हा बनी महबूबा मेरी ये इन्तेजार, उनके इन्तेजार में, लम्हा लम्हा हम अब इस इस इन्तेजार से प्यार करते हैं, लम्हा लम्हा हम अब उनके न आने का इन्तेजार करते हैं...

जामने के जी में क्या है

कभी हमे पागल कभी दीवाना बता दिया, न जाने इस जहाँ में सबके जी में क्या है, कभी मेरे नगमों को अश्क, तो कभी मेरे अश्कों को नगमा बना दिया

मोहब्बत क्या है

जब किसी के खुशियाँ किसी की मुस्कान बन जायें, जब किसी की चाहतें , किसी का अरमान बन जायें, बेपनाह, बे-इंतहां, मोहब्बत , है किसी के दिल में तुम्हारे लिए ये समझ लेना, जब तुम्हारी सांसे, किसी और की जान बन जायें...

के हम बस उनकी जिन्दगी की खातिर जिये जा रहे हैं

जिंदगी का सफर हम किए जा रहे हैं, न जाने क्यो तन्हा सुनी राहों पे चले जा रहे हैं, न जाने क्यो जिंदगी को सहरा किये जा रहे हैं, न जाने क्यो बे मन हम जिये जा रहे हैं, नही आयेंगे वो, ऐतबार हमको भी है, फिर भी न जाने क्यो हम उनका इन्तेजार किए जा रहे है ये न सोचना ये के मौत का डर है हमे, हो न जाए उन्हें कुछ, कही हमारे जाने के बाद , के हम बस उनकी जिन्दगी की खातिर जिये जा रहे हैं

गर इतनी हसीं और खुशनुमा मेरी मौत हैं, तो मुझे जिंदगी नही चाहिए

एक दिन खुदा ने मुझसे कहा, के तेरी जिंदगी बस कुछ पल की है, पर वो आएगी तेरे आगोश में बस एक पल के लिए , मैंने खुदा से कहा, "उस एक पल से ज़्यादा, मुझे जिंदगी नही चाहिए", खुदा ने कहा, तेरी आगोश में आ के उनके होटो पे आएगी मुस्कुराहटें बेपनाह, मैंने खुदा से कहा "मुझे और कोई खुशी नही चाहिए" खुदा ने कहा ओ नादान, संग उसके हो कर, इस जहाँ में तू हो जाएगा तन्हा, मैंने खुदा से कहा "गर वो हैं संगे मेरे मेरी आखरी साँस तक तो, मुझे कोई और साथी नही चाहिए" खुदा ने कहा, के गर वो आएगी तेरे पास, तो तुझे एक बूँद पानी भी नसीब नही होगा, मैंने खुदा से कहा, "बस मेरी आखरी साँस तक वो साथ हों मेरे, इस ४ पल की जिंदगी में जीने के लिए, मुझे कुछ और नही चाहिए", खुदा से रहा न गया, उन्होंने फ़िर कहा, "अरे ओ नादान 'वो आएगी तेरी पहलु में तेरी मौत बन कर'" मैंने कहा "गर इतनी हसीं और खुशनुमा मेरी मौत हैं, तो मुझे जिंदगी नही चाहिए"