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देखी है मैंने एक नन्ही सी परी

मैंने बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं है, पर आज मेरी एक खास ख़ुशी शेयर करने के लिए २ पंक्तियां लिख रहा हु। मेरी प्यारी भांजी के नाम : देखी है मैंने एक नन्ही सी  परी,  फूलों सी  नाजुक, एक नन्ही कली सी, देखी है मैंने एक नन्ही सी परी। जिसे देखते ही मेरी आँखों में चमक सी आ गयी,  एक ही पल में मुझे कितने बचपन दिखा गयी, ऐसा लगता है आसमान से उतर के परी आ गयी। कलियों से भी नाजुक, मासुमियत से भरी, देखि है मैंने एक नन्ही सी परी।  

एक श्रधांजलि: ग़ज़ल के शहंशाह जगजीत सिंह को

हर किसी का वक़्त आएगा, हर जिस्म सुपुर्द-ए-खाख हो जायेगा, तू क्या लाया था जो ले कर जायेगा, खाली हाथ आया था, और याद रख खाली हाथ ही जायेगा, तू तो ना होगा अब कभी भी जहाँ में, पर पीछे तेरे तेरा नाम रह जायेगा| "बेखुदी" के मायने अब बताएगा कौन, "देश में निकले चाँद" की याद पर, परदेशियो को रुलाएगा कौन? न करो ज़िक्र के "बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी" ये समझाएगा कौन? "हाथ छूटे भी तो साथ नहीं छुटते", ये बताएगा कौन? "होठो से छू कर गीतो को अमर" अब बनायेगा कौन? तेरा जैसा, कोई दूजा न हो पायेगा, तेरे मुरीदों, हर लम्हा तू याद आएगा, जब देखेगा कोई "बारिश के पानी में वो कागज की कश्ती", नाम तेरा जेहन में आएगा, कोई जब भी " मुस्कुरा कर गम अपने छिपाएगा", नाम तेरा याद आएगा, जिक्र जब भी "नज़र से पिलाने" की होगी, तू याद आएगा, कोई जब सुनाएगा "चिट्ठी न कोई सन्देश, जाने वो कौन सा देश जहा तुम चले गए" कोई, नाम तेरा याद आएगा| Rest In Peace : Ghazal Maestro Jagjit Singh.

बदलते लोग, बदलती दुनिया

सभी लोगों को नमस्कार, काफी दिनों से कोई पोस्ट नहीं आयी थी, क्योंकि कुछ लिख नहीं पा रहा था, हालात ही कुछ ऐसे थे| हालत ने पूरी तरह से तोड़ दिया था, खैर हिम्मत जुटा कर मै फिर से खड़ा हो गया हूँ| उम्मीद है जल्द ही दौड़ना शुरू कर दूंगा जिंदगी की इस दौड़ में| आशा करता हूँ की आप लोगों को मेरी ये रचना पसंद आएगी| आपका अपना, रविश  ये दुनिया कैसे बदल रही है , कितनी तेजी चल रही है ज़माने आगे और इंसान पीछे जा  रहा, देखो तो बाहर से हर इंसान बड़ा हो गया है, पर इंसान के अन्दर ka   इंसान छोटा हुए जा रहा है, आज कल हर कोई बड़ी जेब, और दिल छोटा लिए घूमता है, दूसरों को निचा दिखा कर, हर कोई आज खुद को ऊँचा समझता है, सामने वाले को धक्का मार कर, यहाँ पे अब हर कोई आगे बढ़ता है, सभी कहते हैं देश तरक्की कर रहा है, हम तरक्की कर रहे हैं, पर जब देखता हु चारो तरफ तो सोचता हु, की क्या यही तरक्की है? ज़माने में इंसान को इंसान की कदर नहीं, किसी को किसी की जान की कदर नहीं, आज कल के बच्चे बड़े तेज होते हैं( हर मामले में), पर इन बच्चों को माँ-बाप की कदर नहीं, पता नहीं क्या चल रहा है, पता नह...

जिंदगी part 2

जिंदगी  हमे  हर  रोज  कुछ  न  कुछ  नया  सिखाती  है... चाहे  कोई  साथ  चले  न  चले, जिंदगी  बेफिक्र  तन्हा-अकेले  चलती जाती  है, जिंदगी  इस  तरह  से  हमे  इस  तरह  से  तन्हा  हो  कर  कभी  रुक न जाना नहीं  ये  सिखाती है, जिंदगी  हर  रोज  हमे  कुछ  नया  बताती है... न रूकती है, न थकती है, न कभी आलस कर के सुस्ताती है, चाहे कितनी भी मुश्किल और  कांटो भरी राह हो, ये चलती जाती है, रुक न जाना कभी काँटों भरी मुश्किल राह देख कर, काँटों पर चल जिंदगी हमे ये बताती है, जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ सिखाती है| ना मुमकिन तो  कुछ भी नहीं, जो  तू चाह तेरी मंजिल है वही, इंसान को चाँद तक पहुंचा कर जिंदगी हमे ये बताती है, जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ नया सिखाती है, जिंदगी हमारी हर पल एक पल आगे निकल जाती है|

जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ नया सिखाती है

जिंदगी हमे कभी कभी न जाने कैसे मोड़ पे लाती है, बनी हुयी जिंदगी, बस एक पल बिखर जाती है, बार बार जिंदगी बिखेर कर, वो हमे एक संवरी हुयी जिंदगी की हमारी जिंदगी में अहमियत बताती है... जिंदगी ठोकरे दे दे कर हम सब को चलना सिखाती है, जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ नया सिखाती है... चाहे कोई साथ चले न चले, जिंदगी बेफिक्र तन्हा-अकेले चलती जाती है, जिंदगी इस तरह से हमे इस तरह से तन्हा हो कर कभी रुकना नहीं ये बताती है, जिंदगी हर रोज हमे कुछ नया बताती है...

मेरे सपने कही खो गए

ऐसा लगता है मेरे सारे सपने कही खो गए, लोगो की की खातिर हम न जाने क्या क्या हो गए, मेरी भी थी कुछ अपनी  ख्वाहिशें, मेरी भी थी चाहतें, मेरे भी अपने कुछ सपने थे, शीशे की तरह चूर चूर सपने मेरे हो गए, सूखे पत्तों की तरह तेज हवा में खो गए, जो चाहा मै वो न कर सका, बेवसी का आलम तो ये था, के चाह कर भी मै किसी से न कह सका, सिसकता रहा, मन ही मन में तो जब तब मै रोया भी, पर नज़र सबकी हमेशा मुझ पर थी, मै चाह कर भी अश्क न बहा सका, दर्द को न बहा सका, मै कभी मै न हो सका, जो चाहा मेरे अपनों ने मै वो होता गया, सब कहते गए मै सुनता गया, जहा तक मुमकिन था, उनके ख्वाबों की मंजिल बुनता गया, किसी ने भी मेरे ख्वाबों के बारे में सुना ही नहीं जैसे मैंने अपनी जिंदगी के बारे कोई ख्वाब बुना ही नहीं| कोई बात नहीं, मै सबसे कह दूंगा के मैंने कोई ख्वाब बुना ही नहीं, क्या होते हैं ख्वाब? मैंने तो इस चिड़िया का नाम पहले सुना ही नहीं| मन ही मन मै ख्वाब बुनता रहूँगा, जो लोग कहेंगे मै सुनता रहूँगा| अपने ख्वाबों को मै अपनी अमानत की तरह सहेजता रहूँगा, जिस दिन ये गुलामी जान लेने पे बन आयेगी, मै पिंजरा तोड़ के...

हुस्न वाले ...

My Friend Manoj Padaliya   sent me this almost 1 month ago, I have his permission to publish this to my blog :). ------------------------------------------------------------------ हुस्न  वाले  वफ़ा  नहीं करते... इश्क  वाले  दगा  नहीं  करते... जुल्म  करना  तो  उनकी  आदत  है ... ये  किसी  का  भला  नहीं  करते... जो  नज़र  आर-पार  हो  जय... वो  ही  दिल  का  करार  हो  जाये... अपनी  जुल्फों  का  दाल  दो  साया... जिंदगी  खुस्गावर  हो  जाये ... तेरी  नजरो  को  देख  पाए  अगर ... शेख  बी  मै-कुसर  हो  जाये... तुझको  देखो  जो  एक  नज़र  वो रंग... चाँद  भी  शर्मसार  हो  जाये... आइना  अपने  सामने  से  हटा... ये  न  हो  खुद  से  प्यार  हो  जाये... भूल  हो...