सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हुस्न वाले ...

My Friend Manoj Padaliya  sent me this almost 1 month ago, I have his permission to publish this to my blog :).
------------------------------------------------------------------


हुस्न  वाले  वफ़ा  नहीं करते...
इश्क  वाले  दगा  नहीं  करते...
जुल्म  करना  तो  उनकी  आदत  है ...
ये  किसी  का  भला  नहीं  करते...
जो  नज़र  आर-पार  हो  जय...
वो  ही  दिल  का  करार  हो  जाये...
अपनी  जुल्फों  का  दाल  दो  साया...
जिंदगी  खुस्गावर  हो  जाये ...
तेरी  नजरो  को  देख  पाए  अगर ...
शेख  बी  मै-कुसर  हो  जाये...
तुझको  देखो  जो  एक  नज़र  वो रंग...
चाँद  भी  शर्मसार  हो  जाये...
आइना  अपने  सामने  से  हटा...
ये  न  हो  खुद  से  प्यार  हो  जाये...
भूल  हो  जाती  है  यु तैश  मैं  आया  न  करो...
फासले  ख़तम  करो  बात  बढाया  न  करो ...
ये निगाहे , ये  इशारे , ये  आदयें  तौबा ...
इन  शराबो  को  सरे  आम  लुटाया  न  करो ...
शाम  गहरी  हो  कुछ  और  हसीं  होती  है...
साये  जुल्फ  को  चेरे  से  हटाया  न  करो...
-----------------------------------------------------
शुक्रिया मनोज.

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ज़िंदगी की कहानी

            ज़िंदगी की बस यही इतनी सी कहानी है, ज़िंदगी बीत जाएगी एक दिन, पीछे बस यादें छूट जानी हैं, ज़िंदगी की यही बस इतनी सी कहानी है। ज़िंदगी का अजीब ये फ़लसफ़ा है, बेहद दिलचस्प इसकी बयानी है, कभी खुशियां हैं बेशुमार, मुस्कुराहटें हैं होंठों पे और मौंजो की रवानी है, तो  कभी गम हैं जानलेवा, अश्क़ हैं, और बेइन्तहां दर्दों में कई दिन और रातें बीत जानी हैं, थोड़ी अजीब तो है, पर कुछ ऐसी ही ज़िंदगी की कहानी है।

देखी है मैंने एक नन्ही सी परी

मैंने बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं है, पर आज मेरी एक खास ख़ुशी शेयर करने के लिए २ पंक्तियां लिख रहा हु। मेरी प्यारी भांजी के नाम : देखी है मैंने एक नन्ही सी  परी,  फूलों सी  नाजुक, एक नन्ही कली सी, देखी है मैंने एक नन्ही सी परी। जिसे देखते ही मेरी आँखों में चमक सी आ गयी,  एक ही पल में मुझे कितने बचपन दिखा गयी, ऐसा लगता है आसमान से उतर के परी आ गयी। कलियों से भी नाजुक, मासुमियत से भरी, देखि है मैंने एक नन्ही सी परी।  

ये नेता नहीं हैं, ये हैं मौत के सौदागर

धरा  बेच  देंगे, गगन  बेच  देंगे, ये  नेता  नहीं  हैं, ये  हैं  मौत  के  सौदागर, ये  तो  लाश  पर  से  उठा  कर  कफ़न  बेच देंगे, खुशियाँ  मानना इनसे  बचकर  ज़रा, नहीं  तो  ये  तेरा  खुशियों  से  भरा  आँगन  बेच  देंगे , कभी  किसी  से  न  कहना , के , ये  नीला  आसमान  हमारा  है , पाता  नहीं  किसको  ये  नीला  गगन  बेच  देंगे , जाना  जो  कभी  तू  बाग़  में , तो  सांस  धीरे  से  ही  लेना , नहीं  तो  ये  हमारा  महकता  हुआ  चमन  बेच  देंगे , इन्हें  तो  हर  दिन  इन्तेजार  होता  है  बस  हादसों  का , गर  लाशें जमा  करने  पर  भी  वोटें   मिलने  लगे  इनको , तो  लाश  इक्कठा   ...