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मुझे मेरा बचपन बहुत याद आता है

"के बहुत याद आता है वो बचपन मुझे , करना बहाने हर बार वो लड़ना हर बात पे, वो होली दिवाली वो हसी ठिठोली , वो दोस्तों के साथ स्कूल से भाग जन, वो अगले दिन मार खाना, वो क्रिकेट के matches , वो दोस्तों के अपने-अपने batches, वो हम भाई-बहनों का करना मार, फिर जी भर के एक दुसरे से दिखाना प्यार, वो छोटे से पिल्लै पे दिखाना दुलार, वो उसकी की खातिर सुनना बाते बार-बार, वो छोटे भाई की खातिर करना अपने जिगरी यार से मार, क्या, क्या बताऊ के याद आता है, के मुझे मेरा बचपन बहुत याद आता है वो माँ के हाथ की पहली रोटी खाने की खातिर लड़ना, वो पहली रोटी न मिलने पर बहेना का घर में मचाना घमासान, वो रह रोटी में बस उनका प्यार, वो खाना फेकने पर सुनना बातें चार :), वो सुखी रोटी में भी गाजर की हलवे सा मज़ा, वो बहार खाना खाने को समझना सज़ा (होटल के खाने मिर्ची ज्यादा होती थी न :) ) वो माँ से करना dishes की डिमांड, वो मेरी खातिर वो बनानें, को वो माँ की दिन रात की मेहनत यार, क्या, क्या बताऊ के याद आता है, मुझे माँ की हर रोटी का प्यार याद आता है वो सरे फॅमिली...

रेत मे कोई फूल खिले एक ज़माना बीत गया

आज ही मैं सब बातें मन की पानी पे लिख आऊँगी, रेत में कोई राज़ बहाए एक ज़माना बीत गया, चलो तुम्हारा नाम लिखें, सागर के किनारे साहिल पर, रेत मे कोई फूल खिले एक ज़माना बीत गया

कैसे टुटा शीशा???

सवाल ये नही के कैसे टुटा शीशा, सवाल ये नही के कितने टुकडो में टुटा शीशा, सवाल ये भी नही के क्यों टुटा शीशा, सवाल तो ये है के पत्थर किधर से आया...?

क्या है इतने गहरे समंदर में?

क्या है इतने गहरे समंदर में ? कभी कस्ती, कभी तूफ़ां, कभी लहरें, कभी उनकी मस्ती, समंदर में; कई यादें, कई आंसू, कई चहरे समंदर में. आज तक कौन समझा है की क्या है इतने गहरे समंदर में, शायद खुद समंदर भी नहीं??

लम्हा लम्हा इन्तेजार

लम्हा लम्हा तन्हा रहे, हम उनके इन्तेजार में, लम्हा लम्हा किया इन्तेर्जार उनके इन्तेजार में, लम्हा लम्हा उठाया लुफ्त इन्तेजार का उनके इन्तेजार में, न जाने किस लम्हा बनी महबूबा मेरी ये इन्तेजार, उनके इन्तेजार में, लम्हा लम्हा हम अब इस इस इन्तेजार से प्यार करते हैं, लम्हा लम्हा हम अब उनके न आने का इन्तेजार करते हैं...

जामने के जी में क्या है

कभी हमे पागल कभी दीवाना बता दिया, न जाने इस जहाँ में सबके जी में क्या है, कभी मेरे नगमों को अश्क, तो कभी मेरे अश्कों को नगमा बना दिया