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संदेश

है तू किस उलझन में? किस ज़द्दोजेहद में गुम है तू? कौन हूँ मै, क्यो आता हूँ ख्वाबो में तेरे, क्या रिश्ता है मेरा तुझ से? क्यो खोजती है तू ज़वाब इन सवालो के इस जहाँ में, मुमकिन नही मिल जाए मुझ तक आने का रास्ता इस जहाँ में, मै एक खुशबू हूँ , मै मोहब्बत हूँ तेरी, मै तो तेरे दिल में बसा एक एहसास हूँ , तुने देखा था जो सुबह सुबह, मै वो ही हँसी ख्वाब हूँ , मै मोहब्बत हूँ तेरी, मै तो तेरे दिल में बसा एक एहसास हूँ ... आँखें बंद कर के देख अपनी, नज़र आती है जिसकी शक्ल मै वो ही शक्स ख़ास हूँ, मै तो खुशबू हूँ तेरी, मै तो तेरे दिल में बसा एक एहसास हूँ, मै मोहब्बत हूँ तेरी, मै पहली मोहब्बत का वही खुशनुमा एहसास हूँ , मै मोहब्बत हूँ तेरी, मै तो तेरे दिल में बसा एक एहसास हूँ ... दूर नही मै कभी भी तुझसे, मै तो हर पल तेरे पास हूँ, बसा हूँ मै तेरे दिल में धड़कने बन कर, मै तो हर कदम तेरे साथ हूँ , तू मेरी बंदगी है, तू मेरी जिंदगी है, तू मेरी जीने की वजह ख़ास है, तू धडकनों में बस्ती है मेरी, तेरी खुशबू मेरे लिए जिंदगी का एहसास है, तू मोहब्बत है मेरी, तू मेरे दिल में बसी जिंदगी का एहसास है, तेरे दिल मे...

किस कायनात से तुम आयी हो

इठलाती सी, बलखाती सी, सबांबों के रंग उडाती सी, गुलाब की खुशबू की तरह इस फिजा को महकती सी, अभी भी बचपन हो जैसे दिल में बसा, ऐसी मासूमियत से मुस्काती सी, छुई मुई को भी अपनी नाजुक छुंअन से लजाती सी, बाला की, परियो सी खूबसूरती तुम लाई हो, के न जाने किस कायनात से तुम आयी हो, जब से देखा है तुमको बस दिल पे तुम्ही छाई हो, के इतना बता दो हमे किस कायनात से तुम आयी हो... तुम्हारी आँखें जैसे मैखाना, बिन पिए ही हम पर खुमारी छाई है, तुम्हारी मुस्कराहट मोतियों सी , मुकुरती हो तो लगता है ये, सारे जहाँ में खुशी छाई हो, है तुम्हारे चेहरे पर वो नूर, वो हया, वो मासूमियत, जैसे बचपन की मासूमियत किसी ने, ताउम्र दिल में अपने बसाई हो, खूबसूरती तुम्हारी कुछ ऐसी है, जैसे "ख़ूबसूरत" अल्फाज़ ने भी जहाँ में एक नयी मिसाल पाई हो, देखा कर तुम्हे ये लगता "खुदा ने बरसो का वक्त ले, बड़े ही फुर्सत से, खूबसूरती की मिसाल बनाई हो", देख कर तुम्हे यु लगता है, जैसे परियो के जहाँ से कोई परी, इस जहाँ में चली आयी हो, अब न सताओ, बस इतना बता दो, कहाँ है वो परियों का देश जहा से तुम आयी हो. के जब से देखा है ...

बुलावा खुदा ने भेजा है

"मेरी रुख्सदगी का तू ऐसा जश्न मानना, के चाहे मिट जाए मेरी यादों के हर निशाँ ये जहाँ, पर दिन मेरी रुख्सदगी का दिन सालों याद रखे ये जमाना" न गम करो मेरे जाने का लोगो, के फ़िर आऊंगा मैं जाना तो पड़ेगा ही क्योंकि बुलावा उस "खुदा" ने भेजा है, भला उसके बुलावे को कैसे ठुकराऊंगा मैं, अभी जाने दो मुझे, पर वडा है मेरा लौट कर ज़रूर आऊंगा मई, हर एक पल जो जिया हु यहाँ पे, उसे कभी न भूल पाउँगा मैं, जो हो शिकायत मुझसे अभी ही कर लो, चला गया जो मैं एक बार यहाँ से, किसी की कोई भी शिकायत दूर न कर पाउँगा मैं, मुझको कोई भी जल्दी नही जाने, मजबूर हु मई, कुछ भी नही है मेरे हाथो, क्योंकि, बुलावा खुदा ने भेजा है, चाह कर भी और रुक न पाउँगा मैं, वो जिनको शिकायत है मुझसे, आना जरूर मेरी मैयत पर, आ कर मेरी मैयत मेरे मुस्कुराने से, मेरी मैयत पे जी भर मुस्कुरा लेना, खुश हो लेना ये सोच के खुदा ने तुम्हारी फरियाद सुन ली है, ईद या दिवाली हो लगे तुम्हारे आशियानों को एक बार ही देख के, इस तरह मेरी मैयत जाने से पहले, अपने घरो को सजा लेना, जश्न ऐसा मानना मेरी रुखसत का, के सारा जहाँ रौशन हो जाए, बाद जाने...

लगता है प्यासी धरती से जैसे खुदा रूठ गया है

"बस , अब मै और न जी पाऊंगा लड़ लड़ इस जहा के साथ, आज मेरा लड़ लड़ के गमो से जीने का हौसला टूट गया है" इस कदर हमसे हमारा हमनवा रूठ गया है , लगता है प्यासी धरती से जैसे खुदा रूठ गया है , न पूछा न बताया ही के क्या है गलती मेरी , न जाने क्यो वो हमसे बे - वजह रूठ गया है ... अब हम मुस्कुराते नही हैं , ये शिकायत न करना कोई , मुझसे मेरी खुशियों का खुदा रूठ गया है , अचानक , न जाने क्यो बोझ सी लगाने लगी है जिंदगी , ऐसा लगता है मुझसे जीने का हौसला रूठ गया है , न जाने क्यो , युही वो बे - वजह रूठ गया है ... आती थी खुशियाँ संग उसके ही मेरे दर्र तक , अब भूले से भी गुजरती नही हैं खुशियाँ मेरे दर्र से , ऐसा लगता है मेरी जिंदगी की सड़क से खुशियों का काफिला रूठ गया है , वो क्या रूठा हमसे , हमसे ये सारा जहाँ रूठ गया है , न जाने क्यो हर कोई हमसे बे - वजह रूठ गया है ... आसन नही थी कभी भी ये जिंदगी मेरी , मैंने लड़ के हासिल की है हर खुशी मेरी , बस अब मई और न ...

हमे ये इल्म नहीं था

वो जिनको शिकायत है के हम बेवजह ही हर पल मुस्कुराते हैं , कभी नजरिया बदल के तो देखिएगा , आप को भी इल्म हो जाएगा , के कितनी खूबसूरती से हम अपना हर गम इस जहाँ से छुपाते हैं ” किसी परियों की कहानी की तरह वो इक दिन हमे मिल जायेंगे ये, इल्म नही था, किसी अनजान को बेपनाह हम चाहेंगे ये इल्म नही था, हम भी कभी किसी से अपना दिल ये लगायेंगे ये इल्म नही था, इस दिल में किसी को धडकनों की तरह बसायेंगे ये इल्म नही था, के किसी के इश्क में हम ख़ुद को भूल जायेंगे ये इल्म नही था, के कोई होगा इस जहाँ में कोई हमरा भी हमसफ़र, किसी को हम अपना खुदा बनायेंगे कभी भी हमको इसका इल्म नही था, के वोः हमारी सांसो में हमारी रूह में बस जायेंगे, गर्र आखिएँ बंद भी कर लू तो वोः ही नज़र आयेंगे, के वोः हमारे रोम रोम में बस जायेंगे, के गर कोई नाम हमारा पूछेगा, तो हम नाम उनका बताएँगे, के इस कदर हम दीवाने हो जायेंगे, हमको कभी ये इल्म नही था, के कभी किसी नाजनीन, किसी महजबीं को हम अपना कह पाएंगे, के वो हमारी जिंदगी का न जाने कब हर पल बन जायेंगे, के कब वो हमारी धडकनों की वजह बन जायेंगे, के उनक...

जब भी वो तन्हा होंगे, वो हमारे बारे में सोचते होंगे

जब भी वो तन्हा होंगे, वो हमारे बारे में सोचते होंगे, मेरी आंखों में अश्क होंगे, और उनका दामन भीगा होगा, कोई मेरे होठो को छू कर गुजरा है, ज़रूर उसकी खुशबू का झोंका होगा, ज़र्रा ज़र्रा हूँ मै ना जाने कब से, वो भी पल पल बिखरा होगा, आज क्यों ये भी मौसम बरसात हो रही है ? लगता है मेरी याद में वो जी भर कर रोया होगा... इक ज़माना हो गया आज मुझे उसकी सूरत देखे, आँखें लगाये दरवाजे पर, वो शायद हर पल हमारा ही रास्ता देखता होगा...

मेरी जिंदगी एक खुली किताब सी है,

मेरी जिंदगी एक खुली किताब सी है, मैंने अपना हर राज़ अपने चेहरे और अपनी आखो में छुपाया, कोशिशें तो कई लोगो ने, पर अब तक कोई मेरी चेहरे के इस लिखे को समझ नही पाया है, इस ज़हान में जाना हर किसी ने, मेरे बारे में जन सिर्फ़ वो ही और उतना ही है, जो कुछ मैंने यहाँ सबको बताया है मै भला हु या हु बुरा, ये किसी को क्या मालूम, वो तो समझे मेरे बारे में बस उतना ही हैं जितना उनको हर किसी ने बताया है, हर एहसास जो उनकी खातिर मेरे दिल में हैं, वो मेरी नजरों में देखते हैं, नज़रें तो मिलाई हैं कई बार उसने, पर न मेरे एहसासों को क्यो वो समझ पाया नही, चाहा तो उसे ताउम्र हमने, हाँ पर कभी अल्फाजों में उसे ये बताया नही, मेरी जिंदगी तो एक खुली किताब सी थी, न जाने इसके लिखे को वो भी क्यो समझ पाया नही, वो एक बात जो सच है सबसे बड़ा मेरी जिंदगी का, वो भी नही समझा क्योंकि हमने कभी उसे समझाया नही, चाहत को उसकी दिल में सम्हाले रखा, चाहते हैं तुम्हे ये कभी बेपनाह हम, कभी जुबां से उसको बताया नही....