सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लगता है प्यासी धरती से जैसे खुदा रूठ गया है

"बस , अब मै और न जी पाऊंगा लड़ लड़ इस जहा के साथ,
आज मेरा लड़ लड़ के गमो से जीने का हौसला टूट गया है"



इस कदर हमसे हमारा हमनवा रूठ गया है,
लगता है प्यासी धरती से जैसे खुदा रूठ गया है,
पूछा बताया ही के क्या है गलती मेरी,
जाने क्यो वो हमसे बे-वजह रूठ गया है...


अब हम मुस्कुराते नही हैं, ये शिकायत करना कोई,
मुझसे मेरी खुशियों का खुदा रूठ गया है,
अचानक, जाने क्यो बोझ सी लगाने लगी है जिंदगी,
ऐसा लगता है मुझसे जीने का हौसला रूठ गया है,
जाने क्यो, युही वो बे-वजह रूठ गया है...

आती थी खुशियाँ संग उसके ही मेरे दर्र तक,
अब भूले से भी गुजरती नही हैं खुशियाँ मेरे दर्र से,
ऐसा लगता है मेरी जिंदगी की सड़क से खुशियों का काफिला रूठ गया है,
वो क्या रूठा हमसे, हमसे ये सारा जहाँ रूठ गया है,
जाने क्यो हर कोई हमसे बे-वजह रूठ गया है...

आसन नही थी कभी भी ये जिंदगी मेरी,
मैंने लड़ के हासिल की है हर खुशी मेरी,
बस अब मई और इस जहाँ से लड़ पाऊंगा,
एक और कदम भी लड़ के आगे बढ़ पाऊंगा,
बस यही खतम होती जिंदगी मेरी, कर दो खाख तमाम जिंदगी मेरी,
मुझसे मेरे जीने का आज हौसला रूठ गया है,
जी पाउँगा एक पल भी मै गमो के साथ, क्योंकि अब मेरा लड़ने का हौसला टूट गया है

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ज़िंदगी की कहानी

            ज़िंदगी की बस यही इतनी सी कहानी है, ज़िंदगी बीत जाएगी एक दिन, पीछे बस यादें छूट जानी हैं, ज़िंदगी की यही बस इतनी सी कहानी है। ज़िंदगी का अजीब ये फ़लसफ़ा है, बेहद दिलचस्प इसकी बयानी है, कभी खुशियां हैं बेशुमार, मुस्कुराहटें हैं होंठों पे और मौंजो की रवानी है, तो  कभी गम हैं जानलेवा, अश्क़ हैं, और बेइन्तहां दर्दों में कई दिन और रातें बीत जानी हैं, थोड़ी अजीब तो है, पर कुछ ऐसी ही ज़िंदगी की कहानी है।

देखी है मैंने एक नन्ही सी परी

मैंने बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं है, पर आज मेरी एक खास ख़ुशी शेयर करने के लिए २ पंक्तियां लिख रहा हु। मेरी प्यारी भांजी के नाम : देखी है मैंने एक नन्ही सी  परी,  फूलों सी  नाजुक, एक नन्ही कली सी, देखी है मैंने एक नन्ही सी परी। जिसे देखते ही मेरी आँखों में चमक सी आ गयी,  एक ही पल में मुझे कितने बचपन दिखा गयी, ऐसा लगता है आसमान से उतर के परी आ गयी। कलियों से भी नाजुक, मासुमियत से भरी, देखि है मैंने एक नन्ही सी परी।  

ये नेता नहीं हैं, ये हैं मौत के सौदागर

धरा  बेच  देंगे, गगन  बेच  देंगे, ये  नेता  नहीं  हैं, ये  हैं  मौत  के  सौदागर, ये  तो  लाश  पर  से  उठा  कर  कफ़न  बेच देंगे, खुशियाँ  मानना इनसे  बचकर  ज़रा, नहीं  तो  ये  तेरा  खुशियों  से  भरा  आँगन  बेच  देंगे , कभी  किसी  से  न  कहना , के , ये  नीला  आसमान  हमारा  है , पाता  नहीं  किसको  ये  नीला  गगन  बेच  देंगे , जाना  जो  कभी  तू  बाग़  में , तो  सांस  धीरे  से  ही  लेना , नहीं  तो  ये  हमारा  महकता  हुआ  चमन  बेच  देंगे , इन्हें  तो  हर  दिन  इन्तेजार  होता  है  बस  हादसों  का , गर  लाशें जमा  करने  पर  भी  वोटें   मिलने  लगे  इनको , तो  लाश  इक्कठा   ...