सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बुलावा खुदा ने भेजा है

"मेरी रुख्सदगी का तू ऐसा जश्न मानना,
के चाहे मिट जाए मेरी यादों के हर निशाँ ये जहाँ,
पर दिन मेरी रुख्सदगी का दिन सालों याद रखे ये जमाना"



न गम करो मेरे जाने का लोगो, के फ़िर आऊंगा मैं
जाना तो पड़ेगा ही क्योंकि बुलावा उस "खुदा" ने भेजा है,
भला उसके बुलावे को कैसे ठुकराऊंगा मैं,
अभी जाने दो मुझे, पर वडा है मेरा लौट कर ज़रूर आऊंगा मई,


हर एक पल जो जिया हु यहाँ पे, उसे कभी न भूल पाउँगा मैं,
जो हो शिकायत मुझसे अभी ही कर लो, चला गया जो मैं एक बार यहाँ से,
किसी की कोई भी शिकायत दूर न कर पाउँगा मैं,
मुझको कोई भी जल्दी नही जाने, मजबूर हु मई, कुछ भी नही है मेरे हाथो,
क्योंकि, बुलावा खुदा ने भेजा है, चाह कर भी और रुक न पाउँगा मैं,






वो जिनको शिकायत है मुझसे, आना जरूर मेरी मैयत पर,
आ कर मेरी मैयत मेरे मुस्कुराने से, मेरी मैयत पे जी भर मुस्कुरा लेना,
खुश हो लेना ये सोच के खुदा ने तुम्हारी फरियाद सुन ली है,
ईद या दिवाली हो लगे तुम्हारे आशियानों को एक बार ही देख के,
इस तरह मेरी मैयत जाने से पहले, अपने घरो को सजा लेना,
जश्न ऐसा मानना मेरी रुखसत का, के सारा जहाँ रौशन हो जाए,
बाद जाने के मेरे यहाँ से, मेरी यादो के नमो निशाँ मिटा देना,
मेरी साड़ी यादें मेरी चिता के साथ ही जला देना,
मेरी गुजारिश है सब से की एक भी अश्क न बहाना,
गर यु अश्क बहाओगे, तो मुस्कुराते हुए जा न पाउँगा मैं,
समझो कुछ मेरी भी मजबूरी, बुलावा खुदा ने भेजा है, अब रुक न पाउँगा मैं









टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ज़िंदगी की कहानी

            ज़िंदगी की बस यही इतनी सी कहानी है, ज़िंदगी बीत जाएगी एक दिन, पीछे बस यादें छूट जानी हैं, ज़िंदगी की यही बस इतनी सी कहानी है। ज़िंदगी का अजीब ये फ़लसफ़ा है, बेहद दिलचस्प इसकी बयानी है, कभी खुशियां हैं बेशुमार, मुस्कुराहटें हैं होंठों पे और मौंजो की रवानी है, तो  कभी गम हैं जानलेवा, अश्क़ हैं, और बेइन्तहां दर्दों में कई दिन और रातें बीत जानी हैं, थोड़ी अजीब तो है, पर कुछ ऐसी ही ज़िंदगी की कहानी है।

देखी है मैंने एक नन्ही सी परी

मैंने बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं है, पर आज मेरी एक खास ख़ुशी शेयर करने के लिए २ पंक्तियां लिख रहा हु। मेरी प्यारी भांजी के नाम : देखी है मैंने एक नन्ही सी  परी,  फूलों सी  नाजुक, एक नन्ही कली सी, देखी है मैंने एक नन्ही सी परी। जिसे देखते ही मेरी आँखों में चमक सी आ गयी,  एक ही पल में मुझे कितने बचपन दिखा गयी, ऐसा लगता है आसमान से उतर के परी आ गयी। कलियों से भी नाजुक, मासुमियत से भरी, देखि है मैंने एक नन्ही सी परी।  

ये नेता नहीं हैं, ये हैं मौत के सौदागर

धरा  बेच  देंगे, गगन  बेच  देंगे, ये  नेता  नहीं  हैं, ये  हैं  मौत  के  सौदागर, ये  तो  लाश  पर  से  उठा  कर  कफ़न  बेच देंगे, खुशियाँ  मानना इनसे  बचकर  ज़रा, नहीं  तो  ये  तेरा  खुशियों  से  भरा  आँगन  बेच  देंगे , कभी  किसी  से  न  कहना , के , ये  नीला  आसमान  हमारा  है , पाता  नहीं  किसको  ये  नीला  गगन  बेच  देंगे , जाना  जो  कभी  तू  बाग़  में , तो  सांस  धीरे  से  ही  लेना , नहीं  तो  ये  हमारा  महकता  हुआ  चमन  बेच  देंगे , इन्हें  तो  हर  दिन  इन्तेजार  होता  है  बस  हादसों  का , गर  लाशें जमा  करने  पर  भी  वोटें   मिलने  लगे  इनको , तो  लाश  इक्कठा   ...