ज़िंदगी की बस यही इतनी सी कहानी है, ज़िंदगी बीत जाएगी एक दिन, पीछे बस यादें छूट जानी हैं, ज़िंदगी की यही बस इतनी सी कहानी है। ज़िंदगी का अजीब ये फ़लसफ़ा है, बेहद दिलचस्प इसकी बयानी है, कभी खुशियां हैं बेशुमार, मुस्कुराहटें हैं होंठों पे और मौंजो की रवानी है, तो कभी गम हैं जानलेवा, अश्क़ हैं, और बेइन्तहां दर्दों में कई दिन और रातें बीत जानी हैं, थोड़ी अजीब तो है, पर कुछ ऐसी ही ज़िंदगी की कहानी है।
मैं तुझसे कहूँ या ना कहूँ, तुझे तो मालूम है, के मेरा क्या हाल है, मेरे ख्वाबों पे हुकूमत है बस तेरी, तुझ से ही मेरा ये रंग-ए-जमाल है, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही खय़ाल है॥ जब सोचता हूँ तेरे बारे में, मैं यूँ ही बेवजह मुस्कुराता हूँ, जब सोचूं तेरे बारे में, कुछ और सोच नहीं पता हूँ। तुझसे इक पल कि इस दुरी से ही देख हाल मेरा बेहाल है, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही खय़ाल है॥ मैं चाहता हूँ कह दूँ, कि तुही मेरी ज़िंदगी है, पर अल्फ़ाज़ों में कह न सकूंगा के तुझसे ही जुडी मेरी हर ख़ुशी है, ज़ज्बातों कि बात और है, उनकी तो सुनता कोई नहीं है, पर तुझे तो मालूम है कि अल्फ़ाज़ों से मेरी कभी बनी नहीं है, बड़ी उलझन में हूँ, कैसे कहूं कि तेरी याद में मेरा हाल बेहाल है, बिन कहे ही समझ जाना तू, कि, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही ख्याल है, मुझे हर पल बस तेरा ही खय़ाल है॥