सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

ज़िंदगी की कहानी

            ज़िंदगी की बस यही इतनी सी कहानी है, ज़िंदगी बीत जाएगी एक दिन, पीछे बस यादें छूट जानी हैं, ज़िंदगी की यही बस इतनी सी कहानी है। ज़िंदगी का अजीब ये फ़लसफ़ा है, बेहद दिलचस्प इसकी बयानी है, कभी खुशियां हैं बेशुमार, मुस्कुराहटें हैं होंठों पे और मौंजो की रवानी है, तो  कभी गम हैं जानलेवा, अश्क़ हैं, और बेइन्तहां दर्दों में कई दिन और रातें बीत जानी हैं, थोड़ी अजीब तो है, पर कुछ ऐसी ही ज़िंदगी की कहानी है।
हाल की पोस्ट

मुझे हर पल बस तेरा ही खय़ाल है

मैं तुझसे कहूँ या ना कहूँ, तुझे तो मालूम है, के मेरा क्या हाल है, मेरे ख्वाबों पे हुकूमत है बस तेरी, तुझ से ही मेरा ये रंग-ए-जमाल है, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही  खय़ाल है॥ जब सोचता हूँ तेरे बारे में, मैं यूँ ही बेवजह मुस्कुराता हूँ, जब सोचूं तेरे बारे में,  कुछ और सोच नहीं पता हूँ। तुझसे इक पल कि इस  दुरी से ही देख  हाल मेरा बेहाल है, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही  खय़ाल है॥ मैं चाहता हूँ कह दूँ, कि तुही मेरी ज़िंदगी है, पर अल्फ़ाज़ों में कह न सकूंगा के तुझसे ही जुडी मेरी हर ख़ुशी है, ज़ज्बातों कि बात और है, उनकी तो सुनता कोई नहीं है, पर तुझे तो मालूम है कि अल्फ़ाज़ों से मेरी कभी बनी नहीं है, बड़ी उलझन में हूँ, कैसे कहूं कि तेरी याद में मेरा हाल बेहाल है, बिन कहे ही समझ जाना तू, कि, मैं चाहे तुझसे दूर कितनी भी हूँ, मुझे हर पल बस तेरा ही ख्याल है, मुझे हर पल बस तेरा ही  खय़ाल है॥

देखी है मैंने एक नन्ही सी परी

मैंने बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं है, पर आज मेरी एक खास ख़ुशी शेयर करने के लिए २ पंक्तियां लिख रहा हु। मेरी प्यारी भांजी के नाम : देखी है मैंने एक नन्ही सी  परी,  फूलों सी  नाजुक, एक नन्ही कली सी, देखी है मैंने एक नन्ही सी परी। जिसे देखते ही मेरी आँखों में चमक सी आ गयी,  एक ही पल में मुझे कितने बचपन दिखा गयी, ऐसा लगता है आसमान से उतर के परी आ गयी। कलियों से भी नाजुक, मासुमियत से भरी, देखि है मैंने एक नन्ही सी परी।  

एक श्रधांजलि: ग़ज़ल के शहंशाह जगजीत सिंह को

हर किसी का वक़्त आएगा, हर जिस्म सुपुर्द-ए-खाख हो जायेगा, तू क्या लाया था जो ले कर जायेगा, खाली हाथ आया था, और याद रख खाली हाथ ही जायेगा, तू तो ना होगा अब कभी भी जहाँ में, पर पीछे तेरे तेरा नाम रह जायेगा| "बेखुदी" के मायने अब बताएगा कौन, "देश में निकले चाँद" की याद पर, परदेशियो को रुलाएगा कौन? न करो ज़िक्र के "बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी" ये समझाएगा कौन? "हाथ छूटे भी तो साथ नहीं छुटते", ये बताएगा कौन? "होठो से छू कर गीतो को अमर" अब बनायेगा कौन? तेरा जैसा, कोई दूजा न हो पायेगा, तेरे मुरीदों, हर लम्हा तू याद आएगा, जब देखेगा कोई "बारिश के पानी में वो कागज की कश्ती", नाम तेरा जेहन में आएगा, कोई जब भी " मुस्कुरा कर गम अपने छिपाएगा", नाम तेरा याद आएगा, जिक्र जब भी "नज़र से पिलाने" की होगी, तू याद आएगा, कोई जब सुनाएगा "चिट्ठी न कोई सन्देश, जाने वो कौन सा देश जहा तुम चले गए" कोई, नाम तेरा याद आएगा| Rest In Peace : Ghazal Maestro Jagjit Singh.

बदलते लोग, बदलती दुनिया

सभी लोगों को नमस्कार, काफी दिनों से कोई पोस्ट नहीं आयी थी, क्योंकि कुछ लिख नहीं पा रहा था, हालात ही कुछ ऐसे थे| हालत ने पूरी तरह से तोड़ दिया था, खैर हिम्मत जुटा कर मै फिर से खड़ा हो गया हूँ| उम्मीद है जल्द ही दौड़ना शुरू कर दूंगा जिंदगी की इस दौड़ में| आशा करता हूँ की आप लोगों को मेरी ये रचना पसंद आएगी| आपका अपना, रविश  ये दुनिया कैसे बदल रही है , कितनी तेजी चल रही है ज़माने आगे और इंसान पीछे जा  रहा, देखो तो बाहर से हर इंसान बड़ा हो गया है, पर इंसान के अन्दर ka   इंसान छोटा हुए जा रहा है, आज कल हर कोई बड़ी जेब, और दिल छोटा लिए घूमता है, दूसरों को निचा दिखा कर, हर कोई आज खुद को ऊँचा समझता है, सामने वाले को धक्का मार कर, यहाँ पे अब हर कोई आगे बढ़ता है, सभी कहते हैं देश तरक्की कर रहा है, हम तरक्की कर रहे हैं, पर जब देखता हु चारो तरफ तो सोचता हु, की क्या यही तरक्की है? ज़माने में इंसान को इंसान की कदर नहीं, किसी को किसी की जान की कदर नहीं, आज कल के बच्चे बड़े तेज होते हैं( हर मामले में), पर इन बच्चों को माँ-बाप की कदर नहीं, पता नहीं क्या चल रहा है, पता नह...

जिंदगी part 2

जिंदगी  हमे  हर  रोज  कुछ  न  कुछ  नया  सिखाती  है... चाहे  कोई  साथ  चले  न  चले, जिंदगी  बेफिक्र  तन्हा-अकेले  चलती जाती  है, जिंदगी  इस  तरह  से  हमे  इस  तरह  से  तन्हा  हो  कर  कभी  रुक न जाना नहीं  ये  सिखाती है, जिंदगी  हर  रोज  हमे  कुछ  नया  बताती है... न रूकती है, न थकती है, न कभी आलस कर के सुस्ताती है, चाहे कितनी भी मुश्किल और  कांटो भरी राह हो, ये चलती जाती है, रुक न जाना कभी काँटों भरी मुश्किल राह देख कर, काँटों पर चल जिंदगी हमे ये बताती है, जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ सिखाती है| ना मुमकिन तो  कुछ भी नहीं, जो  तू चाह तेरी मंजिल है वही, इंसान को चाँद तक पहुंचा कर जिंदगी हमे ये बताती है, जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ नया सिखाती है, जिंदगी हमारी हर पल एक पल आगे निकल जाती है|

जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ नया सिखाती है

जिंदगी हमे कभी कभी न जाने कैसे मोड़ पे लाती है, बनी हुयी जिंदगी, बस एक पल बिखर जाती है, बार बार जिंदगी बिखेर कर, वो हमे एक संवरी हुयी जिंदगी की हमारी जिंदगी में अहमियत बताती है... जिंदगी ठोकरे दे दे कर हम सब को चलना सिखाती है, जिंदगी हमे हर रोज कुछ न कुछ नया सिखाती है... चाहे कोई साथ चले न चले, जिंदगी बेफिक्र तन्हा-अकेले चलती जाती है, जिंदगी इस तरह से हमे इस तरह से तन्हा हो कर कभी रुकना नहीं ये बताती है, जिंदगी हर रोज हमे कुछ नया बताती है...