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अप्रैल, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

न जाने कैसी ये दुनिया हो गयी है!!!

न जाने कैसी ये दुनिया हो गयी है, Facebook तो हजारो दोस्त हो गए हैं सबके, पर, बगल में कौन रहता है पता नहीं,  एक मेरा दोस्त  "मुझसे" अब touch में नहीं, क्योकि हर दिन मै उसे scrap regular karta nahi... twitter pe प्रियंका चोपड़ा ने क्या कहा ये है सबकी जुबान पर, पर न जाने माँ की बात से क्यों सर दुखता है??? orkut पर एक "दोस्त" ने लिखा "down with fever" तो न जाने कितनी "get well soon"  की scraps कर दी, third row में  बैठे  बन्दे  को चोट लगी है, आते जाते सबने देखा है, पर कैसे हुआ, जानने का वक़्त वक़्त ही नहीं, get well soon उसे एक बार भी किसी ने कहा नहीं, कैसे कहते, वो तो ऑनलाइन friend list में मिला ही नहीं Flicker/Picasa/Facebook पे दोस्तों की हजारो तस्वीरों पे कमेन्ट कर दिया, पर बगल में बैठे सह कर्मी ( Colleague) को एक बार देखा तक नहीं...!!!   न जाने कैसी ये दुनिया हो गयी है, न जाने क्यों ऐसी ये दुनिया हो गयी है... हर वक़्त online होना वक़्त की ज़रुरत बन गयी है,  पर मोहल्ले की अपनी ही लाइन में रहने वालो से मिलने का वक़्त ह...

बिन कहे ही सब कुछ बता दिया

अलफ़ाज़  हमेशा  नहीं  होते  अंदाज़-ए-बयाँ का  जरिया, ये हमने  जाना उस  दिन, जब मैंने अपना  हाल-ए-दिल  उनको  अपनी  आँखों  में  पढ़ा  दिया, देखा  तो  बहुत  देर  मैंने  उनको, पर  कुछ  भी  न  कहा , न  कुछ  कह  कर  भी  मै  बहुत  कुछ  कह  गया, और  बिन  कहे  ही  मैंने  सब  कुछ  बता  दिया, चुप  चाप  ही  मैंने  सब  कुछ  सुना  दिया , बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया , बिन  कहे  ही  सब  कुछ  बता  दिया... बहुत   सोचता  था  के  उनसे  ये  कहूँगा, जो  आयेंगे  वो  मेरे  सामने, उनको  बहो  में  भर  लूँगा, नर्म  नर्म से उनके  हाथो को  अपने  हाथो  में  ले  कर, एक  शरारत  से  उनके ...